आँखों के विभिन्न हिस्से विशेष पोषक तत्वों से मिलकर बने होते हैं। इनमें से कई तत्व शरीर खुद नहीं बनाता — इन्हें भोजन से प्राप्त किया जाता है। यहाँ जानें कौन सा तत्व किस खाद्य पदार्थ में और कितना।
विस्तार से जानें
पोषण विज्ञान में एक रोचक तथ्य यह है कि रेटिना में DHA फैटी एसिड की सांद्रता शरीर के किसी भी अन्य अंग से अधिक होती है। इसी तरह, लूटेन और ज़ियाजेंथिन केवल आँखों के मैक्युला में ही केंद्रित होते हैं।
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि कौन से खाद्य पदार्थ आँखों की संरचना से सीधे जुड़े हुए हैं। पोषण और आँखों के बीच यह संबंध वैज्ञानिक अनुसंधान का एक सक्रिय क्षेत्र है।
खाद्य पदार्थों में मौजूद तत्व किस तरह आँखों की विभिन्न परतों तक पहुँचते हैं
गाजर में बीटा-कैरोटीन, पालक में लूटेन, मछली में DHA — ये तत्व अलग-अलग खाद्य पदार्थों में अलग-अलग रूपों में पाए जाते हैं।
वसा-घुलनशील तत्व (विटामिन ए, ई, लूटेन) को अवशोषित होने के लिए थोड़े वसा की आवश्यकता होती है। इसीलिए इन्हें तेल या मेवों के साथ मिलाकर खाने की बात पोषण विशेषज्ञ करते हैं।
अवशोषित पोषक तत्व रक्त के साथ पूरे शरीर में पहुँचते हैं। आँखों को रक्त की आपूर्ति एक अलग और विशेष नेटवर्क के माध्यम से होती है।
लूटेन और ज़ियाजेंथिन रेटिना के मैक्युला में, DHA फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं में, और विटामिन सी आँखों के द्रव में जमा होते हैं।
इनमें से प्रत्येक तत्व आँखों के किसी विशेष भाग में केंद्रित होता है
लूटेन एक पीले रंग का कैरोटीनॉयड है जो रेटिना के मध्य भाग — मैक्युला — में जमा होता है। मक्का, केल, हरी मटर और अंडे की जर्दी इसके प्रमुख स्रोत हैं।
लूटेन का निकट संबंधी — यह भी मैक्युला में पाया जाता है। मक्के, लाल शिमला मिर्च और केसर में इसकी मात्रा उल्लेखनीय रूप से अधिक होती है।
फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं की झिल्ली का एक मुख्य घटक। सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन में सबसे अधिक पाया जाता है। अलसी में ALA के रूप में उपलब्ध है।
रोडोप्सिन वर्णक के निर्माण के लिए आवश्यक। यह वर्णक आँखों में प्रकाश संकेतों को संसाधित करता है। यकृत, गाजर और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है।
आँखों के जलीय द्रव (aqueous humor) में विटामिन सी की सांद्रता रक्त की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक होती है। आँवला इसका भारत में सर्वोत्तम प्राकृतिक स्रोत है।
रेटिना में ज़िंक की सांद्रता शरीर के किसी भी अन्य ऊतक से अधिक होती है। यह एंज़ाइम गतिविधि के लिए आवश्यक है। कद्दू के बीज, तिल और दालें मुख्य स्रोत हैं।
भारतीय खाने की विविधता इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि यहाँ के पारंपरिक व्यंजनों में इन तत्वों के कई स्रोत पहले से शामिल रहे हैं। सरसों का साग, गाजर का हलवा, मछली की करी, आँवले की चटनी — ये सब अलग-अलग पोषक तत्वों से भरपूर हैं।
पोषण विज्ञानियों का मानना है कि रंगीन और विविध आहार — जिसमें हरे, नारंगी, पीले और लाल रंग के खाद्य पदार्थ शामिल हों — इन सभी तत्वों की पूर्ति का एक व्यावहारिक तरीका है।
आँखों और पोषण के बीच संबंध पर वैज्ञानिक समुदाय में दशकों से शोध होता आ रहा है। इस क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चित AREDS (Age-Related Eye Disease Study) शोध था जिसमें विभिन्न पोषक तत्वों के स्तर और आँखों की संरचना के बीच संबंध की जाँच की गई।
लूटेन और ज़ियाजेंथिन पर विशेष ध्यान इसलिए दिया जाता है क्योंकि ये तत्व प्रकृति में आँखों के मैक्युला में ही केंद्रित होते हैं — शरीर के किसी अन्य भाग में इतनी मात्रा में नहीं। इससे यह सुझाव मिलता है कि ये तत्व आँखों की संरचना के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
पोषण विशेषज्ञ और नेत्र वैज्ञानिक इस विषय पर मिलकर काम करते हैं। उनका सामूहिक मत यह है कि खाद्य पदार्थों में इन तत्वों की जानकारी आम लोगों तक सरल भाषा में पहुँचनी चाहिए।
"रेटिना में DHA की सांद्रता के बारे में यहाँ पढ़कर पहली बार समझ आया कि मछली को इतनी जगह क्यों दी जाती है। जानकारी बहुत स्पष्ट और वैज्ञानिक भाषा में थी।"
— विनीता सिंह, नागपुर
"मैं शाकाहारी हूँ और मुझे हमेशा लगता था कि ओमेगा-3 केवल मछली से मिलता है। अलसी और अखरोट के बारे में यह जानकारी काम आई।"
— कार्तिक राव, चेन्नई
"विटामिन सी आँखों के द्रव में इतनी मात्रा में होता है — यह तथ्य नया था। आँवले का महत्व अब और स्पष्ट हो गया।"
— नेहा गुप्ता, इंदौर
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मैक्युला रेटिना का केंद्रीय भाग है जो सीधे देखने के लिए उत्तरदायी होता है। इसमें लूटेन और ज़ियाजेंथिन की सांद्रता सबसे अधिक होती है। इन दोनों तत्वों को मैक्युलर पिगमेंट कहा जाता है।
बीटा-कैरोटीन एक प्रोविटामिन है जिसे शरीर विटामिन ए (रेटिनॉल) में बदलता है। यह रूपांतरण आवश्यकतानुसार होता है। गाजर और शकरकंद में बीटा-कैरोटीन, जबकि यकृत और डेयरी उत्पादों में सीधे रेटिनॉल पाया जाता है।
खाद्य पदार्थों से प्राप्त लूटेन की सामान्य आहार मात्रा पर अभी तक कोई विशेष प्रतिबंध दर्ज नहीं है। हालाँकि बहुत अधिक बीटा-कैरोटीन से त्वचा का रंग थोड़ा पीला हो सकता है — यह एक अस्थायी और प्रतिवर्ती बदलाव है।
लूटेन अपेक्षाकृत ताप-स्थिर है। चूँकि यह वसा-घुलनशील है, इसलिए तेल के साथ पकाने पर यह शरीर द्वारा अधिक मात्रा में अवशोषित होता है। केल और पालक को तेल के साथ पकाकर खाना इसी कारण से प्रचलित है।
सामान्यतः हाँ। पौधों के रंगद्रव्य अक्सर पोषक तत्वों से जुड़े होते हैं — नारंगी रंग बीटा-कैरोटीन का, गहरा हरा लूटेन का, और लाल/पीला ज़ियाजेंथिन का संकेत हो सकता है। इसीलिए "रंगीन थाली" का सुझाव पोषण विशेषज्ञ अक्सर देते हैं।